अदृश्यासुर

रचनाकार का नाम-अरविन्द माली

आज भी है जिन्दा ऐसा असुर,
जिसका नाम है अदृश्यासुर,
जिसने मानव को किया मजबुर,
बढ़ रहा हैं इसका गुरूर।

औद्योगिकीकरण हैं इसका कारण,
देखो,ये बढ़ रहा क्षण-क्षण,
रसायनों से फैल रहा है दूर-दूर,
इसमें हमारा ही है कसूर।

हो रहा है ताज को नुकसान,
बेहाल हो रहा इन्सान,
रोको इसे,करो चकनाचुर,
बनो राम,मारो एक और असुर।

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