इतना न करो प्यार

रचनाकार- कपिल शास्त्री.भोपाल

पत्नी को थोडा उदास देखकर सुदीप रेडियो की आवाज़ में आवाज़ मिलाकर गाने लगा “किस बात पे नाराज़ हो,किस बात का है गम।” गाने में और नज़रों में ही एक प्रश्न था। तो बात ये निकली कि दूर महानगर में पढ़ने वाली मम्मी की प्यारी बेटी जी ने बार बार फ़ोन करने की आदत पर थोडा झिड़क दिया था, जो ममता पर गहरी चोट कर गया था।

“निर्मोही है तुम्हारी तरह,रमती जोगी है,जहाँ जाती है वहीँ की हो जाती है,अब यार दोस्त माँ बाप से भी बढ़कर हो गए! बड़ी कहती है “मेरे दोस्त मेरा मज़ाक उड़ाते हैं”,मेरी भेजी हुई मठरी,चूड़ा,केक,अचार तो सब चट कर गए और मेरे हाथ के स्वाद की तारीफ भी कर रहे थे।अब मैं भी कोई इतनी नाककटी नहीं हूँ,अब नहीं लगाऊंगी,देख लेना” कहते हुए आरती का गला रूंध चुका था।सुदीप फिर शुरू हो गया “देखेंगे,देख लेना,देखेंगे ऐं ऐं ऐं,देख लेना।”

फिर थोड़ी देर बाद स्क्रीन सेवर में बेटी के बचपन का फ़ोटो देखकर संयम टूट गया और डरते डरते मिस्ड कॉल दे कर छोड़ दिया।

सुदीप प्रश्नवाचक निगाहों से देखकर,चश्मे के पीछे से दोनों भवें उचका उचका कर फिर गाने लगा “क्या हुआ तेरा वादा,वो कसम वो इरादा।” “माँ हूँ न,तुम नहीं समझोगे”उसने स्पष्ट किया।

इतने में ही बेटी का फ़ोन आ गया “क्यों माँ बाप की याद नहीं आती।” उसने बेटी को ताना दिया। बेटी ने स्पष्ट किया “मम्मी,दिल पर मत लो,पहले मैं काम्प्लेक्स में थी कि आप लोग तो मुझे लोन लेकर पढ़ा रहे हो मगर अब लगता है मैं तो बहुत अमीर हूँ,यहाँ करोड़पतियों के बच्चे मेरे साथ पढ़ते हैं,वो बोलते है,पैसे तो हमारे पास खूब आ जाते हैं पर दो दो तीन तीन महीने तक मम्मी पापा के फ़ोन नहीं आते जिसके लिए हम तरसते हैं वो तेरे पास भरपूर है,वो ज्यादा हर्ट न हो इसलिए आपको ऐसा बोला था।मुझे भी आप दोनों की बहुत याद आती है,पापा को मेरी तरफ से एक किस्सी देना और लव यू मोम।”

अब पापा गाये जा रहे थे “नज़राना भेजा किसी ने प्यार का।”

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