ऑनलाइन प्रेमकथा

रचनाकार- डॉ शिखा कौशिक ‘नूतन’, कांधला [शामली]

सुबह के नौ बजने वाले थे I माँ घर भर की झाड़ू -बुहारी करने के बाद पूजा-पाठ निपटाकर आँगन के बिरवे में जल अर्पण करने पहुंची तो देखा आषाढ़ के माह में भी उसकी इकलौती संतान, निठल्ला, पढाई छोड़ चुका अठ्ठारह बरस का छोरा नंदू अब तक खटिया पर पैर पसारे सोया पड़ा था I सिरहाने तकिये के रखे स्मार्ट फोन पर माँ की नज़र पड़ी तो तन-मन में मानों आग लग गयी I तुलसी में जल चढ़ाकर भुनभुनाती हुई माँ ने खटिया के पास पहुँच झुककर नंदू के कंधे को झकझोरते हुए तेज आवाज़ में कहा ”अरे उठ जा हरामखोर…तेरे पप्पा को खेत गए दो घंटे से ऊपर होने आये और तू सोया पड़ा है…नास हो इस स्मार्टवा का…जाने बारह-बारह बजे रात तक के करे है …तेरे साथ के छोरे किताबों में मगज़ खपावें होर तू नासपिटा इसमें बड़ा रह…उठता है के ना?” माँ की लताड़ ने नंदू की नींद का सारा मज़ा ही चकनाचूर कर दिया I वो जम्हाई लेता हुआ खटिया पर से उठकर खड़ा होता हुआ बोला ”तमे के…गोब्बर-डांगर से जैदा कुच्छ न जानो तम…होर पप्पा को हर टेम खेत,खेत,खेत …यूँ बने के डिज़िटल इंडिआ! महारे जैसे न हो तो ज़ुकरबर्गवा टमाटर बेचेगा … सारा मूड़वा ख़राब कर के रक्ख दिया तैने मम्मीI” माँ को उलटी-सीधी सुना नंदू ने खटिया पर रखे स्मार्ट फोन को उठाया और सुबह को सोकर उठने की सेल्फी ले डालीI नेट जोड़ा और फेस बुक पर अपलोड कर दीI वाह्ट्सअप व् फेसबुक पर आये दसियों मेसेज देखकर उसका मूड फ्रेश हो गया और चेहरा खिल उठाI ज्यादातर मेसेज दोस्तों के थे पर फेसबुक पर जो सबसे खास वाली फ्रेंड थी वो थी ‘नेहा’ ] जिसके साथ वो रात को घंटों -घंटों प्रेमभरी चैट करता रहता और फिर मोहल्ले के लौंडों को पढ़वाता कि ” देक्खो सहर की लड़की कित्ता परेम करे है मुझे …फोटो देक्खो, मक्खन की टिकिया है…बस मने तो इससे ही ब्याह करना है I” लौंडे भी हाँ में हाँ मिलाते पर कोई इस मीठे पान में नीम का पत्ता लगा देता ”देख लिए भाई, कहीं झूठ्ठे को ही तेरा बावला बनारी हो…कल अखबार में पढ़ रिया था कि…” वो बात पूरी करे इससे पहले ही नंदू उसके सिर पर चपत लगाता बोल पड़ता ”रहन दे …तुझे न पुच्छे कोई यूँ जलन होरी दिक्खे …बात बनावे !”
चिढ़कर ऐसे ही किसी लौंडे ने नंदू के पप्पा के कान में ये बात डाल ही दी की ”नंदू किसी फेसबुकिया डायन के चंगुल में फंस गया हैI

बस फिर क्या था नंदू के पप्पा ने उसी दिन खेत से घर आने के बाद निकाल के अपनी चमड़े की चप्पल उसकी खोपड़ी पे इतनी बजाई कि नंदू ने कसम ले ली कि आज के बाद लौंडो को फेसबुक से सम्बंधित कोई अपडेट न दूंगाI मम्मी-पप्पा के रात को सो जाने के बाद नंदू का उस फेसबुकिया प्रेमिका से चैट का सिलसिला शुरू होता और घंटों चलताI वो कहती ” मेरे लिए क्या कर सकते हो?” नंदू को गुदगुदी होती ऐसे सवाल पर और वो झटाझट टाइप कर देता ”चाँद-तारे तोड़ के ला दूंगा सवीटहार्ट…होर तू के कर सके है मेरे लिए ?” झिझकते हुए ये भी पूछ लेता नंदूI वो जवाब में लिखती ”जान दे दूँगी पर कल चैट नहीं हो पायेगी मेरा इंटरनेट का बैलेंस बस आज रात तक का ही है I” नंदू दिलदारी के साथ लिखता -” तू चिंता न कर मैं रिचारज करा दूंगा I”
नंदू कई महीने इसी तरह पैसा बहाता रहा और एक दिन रिचार्ज करने वाले ने दूकान के सामने से गुजरते हुए नंदू के पप्पा से शिकायत कर ही दी कि ”लौंडा किसी और के नंबर पे रिचारज करावे है…मैं पूछूं कि किसका नंबर है तो अकड़के कहवे तेरे से मतलब! भाई जी पर मैं सरच कर के निकाल लिया यूँ भेद…”
और, फिर उसने सारा भेद गरम तेल की भांति नंदू के पप्पा के कान में उड़ेल दियाI ये सब सुनते ही पप्पा का दिमाग भी गरमा गया और घर पहुँचते ही पप्पा ने फुँकारते हुए नंदू को आवाज़ लगाई तो नंदू सिहर उठा और दौड़ता हुआ अपने कमरे से निकाल आँगन में पहुँच गयाI पप्पा चीखते हुए बोला ”हरामखोर …दीवाना बना जा रा, पैसे लुटा रा …न काम न काज, सारे दिन घर में पड़ा यूँ मोबाइल लखे जा होर मैं खेत में धुप में सिकुन…यो नंगी लौंडियाँ देख आँख सेक्को जा… आ तेरा ब्याह करवाऊं डायन से, भल्ला हो रिचारज वाले का जो उनने सरच करके बताया कि जिस नंबर को यूँ बावला रिचारज करावे है वो तो बगड़ के गांव के खेमू का है …वो साला अपनी घरवाली के साथ ऐसे ही लुट्टे हैI झूठी तस्वीर लौंडिया की लगाकर तेरा गधा बना रिये और तू दीवाना हुआ जा रिया I” इतने में नंदू की माँ भी भीतर से आँगन में पहुँच गयी और छाती पीटते हुए रोने लगी ”के बताऊँ लौंडा मन्ने ही ना स्मार्टवा बिन …सारे दिन इसी में आँख गड़ाए रह, जो मैं जैदा टोककुं तो कहवे फांसी लगा लूँगा, है हम तो कहीं के ना रहे इस फेसबुकवा के चक्कर में ”
नंदू सिर झुकाकर सब सुनता रहा और पप्पा ने उसके हाथ से स्मार्टफोन झटकते हुए धमकाते हुए कहा ”यु सुन ले इन डायनों के चक्कर में पड़ा तो तेरी वो गत बनाऊंगा कि तू खुद को न पहचान पावेगाI”
नंदू की इतनी हिम्मत न थी कि वो पप्पा से फोन वापस ले पाताI यद्यपि उसे बिलकुल यकीन न था कि उसकी मक्खन की टिकिया नेहा, फेसबुकिया प्रेमिका झूठी है पर पप्पा की चमड़े की चप्पल का वार याद आते ही उसने अपनी दीवानगी को झटक कर डांगरों की सानी में मिला कर उन्हें खिला दिया और इस तरह एक शानदार ऑनलाइन प्रेमकथा का दुखद अंत हो गया I

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