प्यास

​रचनाकार- राजन कुमार 

तिरे  इश्क़  के  चौराहेे  बैठ  इंतजार  की   साजन

कभी  तो  करे जो  नज़रे  इनायत इधर भी बालम

हर  मोड़  से  आती-जाती  सुनु  में  धड़कनें  तेरी

अब तो आ कर बुझा जा प्यास मिरे प्यार की जानम।

ऐसे  ही  बढ़ती रही तुझे पाने की  मेरे प्यास

क़मर भी  जले देखे  जो  तेरी  यारी मेरे यार

रुखसती के छन तक करूँगा जो तेरा इंतज़ार

आजा भी लगा ले गले अपने तू जो मेरे प्यार।

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