प्रेमचंद…आज कितने प्रासंगिक

लेखक – गौरव कुमार निगम

आज प्रेमचंद का निर्वाण दिवस है. आज ही के दिन प्रेमचंद की मृत्यु हुई लेकिन लेखक भला कहाँ मरते हैं…वो भी प्रेमचंद के कद के.
हिंदी में लिखने वाले प्रेमचंद के पहले भी थे और प्रेमचंद के बाद भी हुए लेकिन प्रेमचंद बस एक ही हुए.
प्रेमचंद का लेखन लोगों के दिलों में घर कर गया तो इसकी वजह उनके लिखे में काव्यात्मक सुन्दरता, बातों की अलंकारिता या व्याकरण का त्रुटिहीन लेखन नही था बल्कि वो पात्र हैं जो उनकी कहानियों के सहारे आजतक जिन्दा हैं. वही पात्र जो लोगों की शकल में प्रेमचंद के आस पास घूम रहे थे.
प्रेमचंद की कई रचनाओं में सौतेली माँ का प्रकोप या माँ के दुलार की अभिलाषा स्पष्ट छपी दिखती है तो उसकी वजह उनके अपने बचपन में सौतेली माँ का दिया व्यवहार रहा. एक नौजवान अक्सर बना रहा उनकी कहानियों में जिसके ऊपर नैतिक और दुनियादार हो जाने का दबाव समान रूप से बना रहा. कुछ लोग रहे उनकी कहानियों में जो ब्रिटिश हुकूमत से आज़ाद होना चाहते थे लेकिन अंग्रेजों की बोटी बोटी करके छितरा देने की मंशा से भरसक परहेज करते रहे. उन्होने खुद बाल विधवा से शादी की और इसे अपनी कहानी में स्पष्ट किया.

प्रेमचंद ने हिंदी में वो ही लिखा जो उनके आस पास था…उस पर कोई मुलम्मा नहीं चढ़ाया. इसलिए जनता का, पढने वालों का उनसे अभी तक मोहभंग नहीं हुआ.
यही वजह है कि आज भी पुस्तक मेलों में प्रेमचंद के किताबों की डिमांड कभी कम नहीं होती क्यूंकि आज भी वो पात्र, वो लोग, वो परिस्थितयां बरक़रार हैं.
गरीबी, भूख, लालच, वात्सल्य जैसे भावों को जैसा प्रेमचंद ने रचा, वैसा किसी ने नहीं.
प्रेमचंद कैसे अप्रासंगिक हो सकते हैं जब वो उनकी कहानियां आज भी उतनी मौजूं हैं जितनी आज के पचास साल पहले थीं.
जब तक हिंदुस्तान में कोई भी किसान पूस की कड़कती ठण्ड में भी जागता हुआ अपने खेत को जानवरों से बचाने के लिए जुगत लगा रहा होगा, जब तक कोई एक भी डॉक्टर चढ्डा किसी गरीब को बिना फीस देखने को राजी नहीं होगा, जब तक दुनिया में प्रेम और चाँद हैं तब तक प्रेमचंद और उनकी कहानियां प्रासंगिक बने रहेंगे.
प्रेमचंद की मुफ्त कहानियां यहाँ क्लिक करके पढ़ें.

Comments

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *