सुरेन्द्र मोहन पाठक- हिंदी पल्प फिक्शन के अतिप्रसिद्ध लेखक के बारे में 33 बातें

रचनाकार- गौरव निगम

हिंदी साहित्य में पल्प फिक्शन को हमेशा से ही निचले पायदान का लेखन माना गयाI हिंदी के स्वनामधन्य मठाधीशों ने लुगदी कागज़ पर छपने की वजह से इस विधा को लुगदी लेखन का नाम दे दिया था जबकि इनका लुगदी कागज़ पर छपने का सबसे बड़ा कारण था किताब की लागत को कम करना ताकि कम से कम दाम में ज्यादा से ज्यादा पढने वालों तक इसकी पहुँच बन सके.

हिंदी में यूँ तो अनेक पल्प फिक्शन लेखक हुए हैं जिनमे से गुलशन नंदा, रानू, मनोज, वेद प्रकाश शर्मा, परशुराम शर्मा वगैरह अपने अपने समय में अतिप्रसिद्ध रह चुके हैं.

श्री सुरेंद्र मोहन पाठक आज के दौर के हिंदी पल्प फिक्शन लेखन के बेताज बादशाह कहे जाते हैं। लगभग तीन सौ नॉवेल लिख चुके श्री सुरेंद्र मोहन पाठक के बारे में आइये जानते हैं 33 रोचक बातें।

1.सुरेंद्र मोहन पाठक जी का जन्म सन 1940 में हुआ था। अमृतसर के करीब खेमगाँव नामक जगह पर सुरेंद्र मोहन पाठक जी का जन्मस्थान है

2.हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और पंजाबी जैसी चार भाषाओँ पर अच्छी पकड़ होने के बावजूद सुरेंद्र मोहन पाठक जी ने हिंदी भाषा को ही अपने लेखन के लिए चुना।

3.सुरेंद्र मोहन पाठक जी ने लिखने की शुरुआत उपन्यासों से नहीं, लघुकथाओं से की थी।

4.उनकी पहली लघुकथा ’57 साल पुराना आदमी’ सन 1959 में मनोहर कहानियां नामक मैगज़ीन में प्रकाशित हुई थी।

5.उनका पहला संपूर्ण नॉवेल ‘पुराने गुनाह नए गुनाहगार’ सन 1963 में ‘नीलम जासूस’ नामक मासिक पत्रिका में छपा था।

6.सुरेंद्र मोहन पाठक जी ने अपने लेखन कार्य के शुरूआती दौर में इयान फ्लेमिंग द्वारा रचित ‘जेम्स बांड’ के कुछ नॉवेल का अनुवाद भी किया है। सुरेंद्र मोहन पाठक जी ने जेम्स बांड को केंद्र में रखकर खुद के नॉवल भी लिखे हैं जो आज दुर्लभ हैं

7.सुरेंद्र मोहन पाठक जी ने अब तक करीब 300 नावेल लिखे हैं जिसमें से ज्यादातर उन्होंने इंडियन टेलीफ़ोन इंडस्ट्री में पूर्णकालिक अफसर के तौर पर काम करते रहने के बावजूद अपने खाली समय में लिख डाले थे

8.’सुनील कुमार चक्रवर्ती’ सुरेंद्र मोहन पाठक जी का रचा सबसे मशहूर पात्र है जिसकी प्रसिध्दि शरलॉक होम्स से कम नहीं है।

9.आजकल आम इस्तेमाल होने वाला शब्द ‘खोजी पत्रिकारिता’ को सुरेंद्र मोहन पाठक जी ने ही गढ़ा है।

10.मुम्बई अंडरवर्ल्ड के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द ‘कंपनी’ भी सुरेंद्र मोहन पाठक जी की लेखनी की उपज है।

11.सुरेंद्र मोहन पाठक जी एक कुशल चित्रकार भी हैं। अपने लेखन के शुरुआती दौर के कुछ नॉवेल्स के कवर उन्होंने खुद डिजाईन किये थे।

12.सुरेंद्र मोहन पाठक जी ने हिंदी क्राइम फिक्शन पर आधारित नॉवेल लिखे हैं जिसे सुनील सीरीज, सुधीर सीरीज, विमल सीरीज, जीता सीरीज, प्रमोद सीरीज, थ्रिलर सीरीज में बांटा जा सकता है।

13.इसके अलावा उन्होंने जोक बुक्स और सामाजिक नॉवेल भी लिखे हैं

14.सुनील सीरीज के अब तक सबसे ज्यादा 121 नॉवेल्स प्रकाशित हो चुके हैं

15.सुरेंद्र मोहन पाठक जी की लिखी हुई सबसे प्रसिद्ध सीरीज ‘विमल सीरीज’ है जिसके तहत अब तक 42 नॉवेल्स प्रकाशित हो चुके हैं।

16.विमल सीरीज पहले नावेल से लेकर अब तक प्रकाशित नॉवेल्स में एक अविरल महागाथा है। 

17.सुधीर कोहली सीरीज के अब तक 22 नॉवेल प्रकाशित हो चुके हैं अब काफी पढ़ने वालों में काफी मशहूर हैं।

18.सुरेंद्र मोहन पाठक जी में 73 थ्रिलर सीरीज के नॉवेल लिखे हैं।

19.थ्रिलर सीरीज के पात्र जैसे मुकेश माथुर, विवेक आगाशे, विवेक गुप्ता, जीत सिंह, प्रमोद ने मुख्य पात्रों जैसी ही प्रसिध्दि पायी है

20.सुरेंद्र मोहन पाठक जी स्वभावतः विनम्र और विनोदी व्यक्ति हैं। उनकी अब तक 23 जोक बुक्स प्रकाशित हो चुकी हैं।

21.इसके अलावा उनके 26 लघु उपन्यास और दो लघु उपन्यास संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

22.सुरेंद्र मोहन पाठक जी के लिखे लेखकीय भी उनके नॉवेल्स की तरह ही मशहूर हैं। लेखकीय ना छपा होने की दशा में उनके पुराने पाठक नॉवेल के भूत लेखक द्वारा लिखे होने की शंका करने लगते हैं।

23.दिल्ली का तंदूर काण्ड सुरेंद्र मोहन पाठक के मावली नॉवेल से प्रेरित बताया जाता है।

24.UTI बैंक, विकासपुरी में डाका डालने की कोशिश करने वाले संदीप भटनागर ने ‘ज़मीर का कैदी’ नावेल से प्रेरणा ली थी।

25.सुरेंद्र मोहन पाठक ने मरिया पूजो के जगत प्रसिद्ध उपन्यास ‘गॉड फ़ादर’ का हिंदी अनुवाद किया है जो मूल कृति जैसा ही बेमिसाल है।

26. सुरेंद्र मोहन पाठक जी के अब तक पांच नॉवेल पैंसठ लाख की डकैती’, दिन दहाड़े डकैती’, हज़ार हाथ’, आखिरी मक़सद ,कोलाबा कॉन्सपिरेसी के अंग्रेजी अनुवाद क्रमश: The 65 Lakh Heist, Daylight Robbery, Framed, he Last Goal और Colaba Conspiracy के शीर्षक से प्रकाशित हो चुके हैं

27.किसी ज़माने में उनके नॉवेल की ब्लैक मार्केटिंग होती थी, उनकी फ़ोटोकॉपी तक बिक जाती थी।

28.हिंदी पल्प फिक्शन में इ बुक्स की शुरुआत करने का श्रेय सुरेंद्र मोहन पाठक जी को जाता है।

29.उनके फैन के द्वारा बनाया गया सुरेंद्र मोहन पाठक जी को समर्पित वेबसाइट, फेसबुक ग्रुप्स और एप्प इंटरनेट पर उपलब्ध हैं

30. सुरेंद्र मोहन पाठक जी स्वयं सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते हैं पर उनके फैंस ने सोशल मीडिया पर उनके कई फैन क्लब बना रखे हैं। ‘जार्जियन’ और ‘स्पार्टन्स’ की तर्ज पर वह खुद को smpiyans कहते हैं।

31.उनके फैंस देश भर के कई शहरों में ‘एसएमपी फैन मीट’ के नाम से साल भर आयोजन करते रहते हैं।

32.सुरेंद्र मोहन पाठक जी के फैंस उनका नाम पदम श्री पुरुस्कारों के लिए प्रस्तावित कर चुके हैं।

33. उनके कुछ अतिप्रसिद्ध नॉवेल मीना मर्डर केस, जहाज का पंक्षी, करमजले, निम्फोमैनियाक, डायल 100, मेरी जान के दुश्मन, हार जीत, पीला गुलाब, कानून का चैलेन्ज, कोई गवाह नही, शक की सुई इत्यदि हैं।

सुरेंद्र मोहन पाठक जी इस उम्र में भी अपने कार्य के प्रति समर्पित हैं और नित नए नॉवेल लिख रहे हैं और उनके फैंस में उनके लिए दीवानगी दिनों दिन बढ़ती जा रही है।  

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