​फिल्म समीक्षा – बाहुबली 2- ‘कट्टप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’

रचनाकार- गौरव निगम

Bahubali 2- The Conclusion 

निर्देशक- SS Rajamouli

अभिनेता/अभिनेत्री-  Prabhas, Rana Daggubati, Anushka Shetty, Ramya Krishnan, Tamannaah Bhatia, Sathyaraj, Nassar

5/5

बाहुबली 2-  द कंक्लूजन, निर्देशक राजामौली का रचा अद्भुत संसार है जहाँ प्रभास, राणा दग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी, राम्या कृष्णन, तमन्ना, सथ्यराज जैसे क़ाबिल एक्टर्स महिष्मति साम्राज्य के अमरेंद्र/ महेंद्र बाहुबली, भल्लालदेव, देवसेना और शिवगामी देवी के रूप में इमोशन, एक्शन, ड्रामा, रोमांस को एक नए आयाम पर ले जाते हैं।

विजुअल इफेक्ट्स- 

सबसे पहले बात करते हैं बाहुबली 2 के विजुअल इफेक्ट्स की।

बाहुबली के पहले पार्ट की तरह ही बाहुबली 2 भी VFX के पैमाने पर हर कोण से भव्य है। इंडिया में इसकी तुलना करने के लिए कोई फिल्म नहीं है।

इस पूरी फिल्म में शिवजी, प्रतीक के रूप में कई जगह मौजूद हैं
फिल्म के ओपनिंग सीन से ही यह फिल्म देखने वालों को मोहित कर लेती है, ख़ासकर लॉन्ग शॉट्स में राजामौली का बसाया गया नगर बहुत सुंदर लगता है।

राजामौली ने पूरा नगर VFX से बसाया है और उसमें छोटी छोटी डिटेल्स का भी जैसे महल के परकोटे पर चींटियों से चलते सिपाही, इमारतों पर दिखती नक्काशी, लड़ाई के दौरान खून के छीटें,…इन सबका बहुत बारीकी से ध्यान रखा है। पानी, नगर और एक्शन से जुड़े दृश्यों में यह रचनात्मकता अपने चरम पर है।

बाहुबली 2 कम से कम एक बार और सिर्फ इसके VFX के लिए म्यूट करके भी देखी जा सकती है।

एक्टिंग- 

प्रभास और राना इस फिल्म की धुरी है और सथ्यराज अनुष्का, राम्या इस महागाथा के खंभे।

प्रभास ने अपनी एक्टिंग से एक रॉयल वारियर, प्रेमी और बेटे…इन तीनों रूपों को बखूबी जिया है। राना दग्गुबाती अपनी एक्टिंग से एक क्रूर शासक की गहरी छाप छोड़ते हैं।

फिल्म देखते हुए आपको यह एहसास हो सकता है कि आपके सामने महाभारत की कहानी एक बार फिर से जिन्दा हो उठी है और आप अर्जुन और दुर्योधन को एक दूसरे के सामने खड़ा देख रहे हैं।

अनुष्का शेट्टी और राम्या के हिस्से तमन्ना से बेहतर सीन्स आये हैं जिसमें यह दोनों ही ड्रामा और एक्शन के पलों में अदभुत लगी हैं।

कहानी के उस हिस्से में जहाँ देवसेना एक लड़की, पत्नी और माँ की जर्नी तय करती हैं, वो हिस्सा इस पात्र का सबसे बेहतरीन हिस्सा है।
सथ्यराज इस स्टारकॉस्ट की जान हैं। कट्टपा के रोल में वह एक्शन सीन्स में बेहद चपल, निर्मम और घातक लगे हैं तो बाद में ग्लानि, दुविधा और द्वन्द के भाव अपने चेहरे से व्यक्त करने में भी पूरी तरह सफल रहे हैं।

एक्शन-

बाहुबली 2 के एक्शन सीन कमाल के हैं। यह पिछली बाहुबली से कहीं अधिक निर्मम है इसलिए कहीं कहीं यह फिल्म एक्शन सीन्स के ट्रीटमेंट में स्पार्टा की याद दिलाती है। इसके अलावा आपको टोनी झा, हल्क की याद आनी तय है।

प्रभास और राना ने इस फिल्म में एक्शन सीन्स विश्वसनीय दिखाने के लिए अपने शरीर पर काफी मेहनत की है मगर उन दोनों को ही निर्देशक ने आजकल के टिपिकल बॉडी कट्स या सिक्स पैक ड्यूड वाले रूप में नहीं ढाला है जो कि उस समय की कहानी से मेल भी नहीं खाता।

राना अपने फिजीक की वजह से खल चरित्र में और भी प्रभावशाली लगे हैं और अपने बाजुओं का दम जब तब आजमाते की कोशिश करते रहते हैं।

इसके अलावा एक्शन का कुछ हिस्सा राम्या, अनुष्का और तमन्ना के हिस्से में भी आया है जिसमें से राम्या और अनुष्का ने अपना पार्ट बखूबी निभाया हैं। तमन्ना एक्शन सीन के लिए ज़रूरी चपलता में अभी थोड़ा पीछे हैं और गुस्सा दिखाने के सीन में भी गुस्सैल लड़की का भाव उनके चेहरे पर पूरी तरह नही दिखता है।

टिपिकल साउथ इंडियन फिल्मों की तरह इसके एक्शन सीन्स जैसे सर्कुलर मोशन में जम्प लगा देना, एक साथ तीन तीरों को छोड़ना, कवच की आड़ में, ताड़ के पेड़ से गुलेल से छूटे पत्थर तरह किले में कूद जाना…कहीं कहीं फिजिक्स के नियमों के परे चले जाते हैं लेकिन इतनी भव्य फिल्म में इतना तो चलता ही है।

संगीत- 

फिल्म की छवि एक एक्शन फिल्म की है मगर फिर भी रोमांस के पलों में राजामौली औऱ कीरावानी ने खूबसूरती से संगीत पिरोया है।

हालाँकि संगीत के मामले में यह बाहुबली 1 से पीछे रह जाती है लेकिन इसका बैकग्राउंड म्यूजिक अद्भुत है।

एक्शन सीन्स में हथियारों की खनक और एंट्री सीन्स में साउंड एडिटिंग का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया गया है।

अंत में ‘जियो रे बाहुबली’ ही हॉल से निकलते वक़्त याद रह जायेगा।

कहानी- 

बाहुबली की कहानी एक साथ भूतकाल और वर्तमान समय की कहानी बताती हुई चल रही थी।  कहानी का एक हिस्सा अमरेंद्र बाहुबली, भल्लालदेव, रानी शिवगामी देवी, और देवसेना की बीच चल रहा था तो दूसरा हिस्से में बाहुबली के बेटे शिवा की भी एंट्री हो चुकी थी।

बाहुबली 2 की कहानी शुरू होती है माहिष्मती साम्राज्य में हर 25 साल के बाद होने वाली पूजा से, जिसका नियम है कि पूजावेदी की तरफ जाती हुई प्रधान राजमहिला के कदम नहीं रुकने चाहिए। शिवगामी इस पूजा के लिए सर पर अग्निकुंड रखकर वेदी की तरफ़ बढ़ती हैं और इसी बीच उत्सव में एक हाथी उपद्रव शुरू कर देता। यहाँ एंट्री होती है अमरेंद्र बाहुबली की जो अपने बल से उस बिगड़ैल हाथी को शांत कर देता है और शिवगामी बिना रुके पूजा संपन्न करती हैं।

शिवगामी देवी बाहुबली को राज्याभिषेक से पहले देशाटन का आदेश देती हैं, जिससे वह राज्य की प्रजा के दुःख दर्द को करीब से समझ सके।

कट्टपा और अमरेंद्र अपनी पहचान छुपा कर पहुँचते हैं कुंतल प्रदेश में, जहाँ की राजकुमारी देवसेना अपने राज्य को पिंडारी लुटेरों से बचाने में जुटी हुई है।

कट्टपा और अमरेंद्र, देवसेना पर पहले से मुग्ध एक कायर राजकुमार कुमारवर्मा के सहायक बन जाते हैं जहाँ अमरेंद्र उसका बेवकूफ सहायक और कट्टपा उसका मामा बनकर उसकी बातें सम्हालता रहता है।

इधर अमरेंद्र पर नजर रखने के लिए भेजा गया जासूस भल्लालदेव को खबर देता है कि अमरेंद्र और कट्टपा दोनों कुंतल प्रदेश में हैं और उसे राजकुमारी देवसेना का चित्र दिखाता है जिसे देखते ही भल्लालदेव उस पर आसक्त हो जाता है।

भल्लालदेव के छल में फँसकर रानी शिवगामी देवी भल्लालदेव को वचन देती हैं कि वह देवसेना को ही उसकी पत्नी बनाएंगी।

मगर देवसेना रानी शिवगामी देवी के भेजे कीमती उपहारों को ठुकरा देती है। जिससे क्रोधित होकर, भल्लालदेव के पिता के सुझाने पर शिवगामी अमरेंद्र तक यह आदेश पहुँचाने को कहती हैं कि देवसेना को बंदी बना कर पेश किया जाये।

उधर उसी रात, पिंडारी देवसेना के राज्य पर आक्रमण कर देते हैं, जिससे अमरेंद्र अपने बल और बुद्धि का प्रयोग करके बचा लेता है।

कायर कुमारवर्मा अमरेंद्र से प्रेरित होकर बहादुर बन जाता है और अमरेंद्र का दोस्त भी।

जीत के बाद कट्टपा अमरेंद्र की पहचान माहिष्मती के युवराज के रूप में देता है। अमरेंद्र देवसेना का हाथ मांगता है जो कि उसके माता पिता और देवसेना मान लेते हैं।

उसी समय अमरेंद्र को शिवगामी का भेजा हुआ, देवसेना को बंदी बनाने का आदेश मिलता है जिसे सुनकर देवसेना पहले तो नानुकुर करती है, पर बाद में अमरेंद्र की उसकी गरिमा की रक्षा के वचन के बाद उसके साथ चलने को तैयार हो जाती है।

सभा में शिवगामी देवी देवसेना को भल्लालदेव से शादी का आदेश देती हैं, जिसके जबाब में देवसेना टिपिकल सास-बहू वाले अंदाज़ में अपनी सास से भिड़ जाती है।

अमरेंद्र के देवसेना का ही साथ देने पर शिवगामी उसकी जगह भल्लालदेव को राजा और अमरेंद्र को सेनापति घोषित कर देती है।

पर, प्रजा अमरेंद्र को ही राजा की तरह चाहती है।

यह बात भल्लालदेव को नहीं पचती।

वह और उसका पिता, अमरेंद्र के खिलाफ, शिवगामी के कान भरते रहते हैं।

देवसेना गर्भवती हो जाती है, लेकिन शिवगामी का आशीर्वाद नहीं पाती।

उधर शिवमंदिर में दर्शन के समय, ‘भल्लालदेव आने वाले हैं’ ऐसा कहकर एक आमात्य देवसेना को देवदर्शन के लिए लगी साधारण जनता वाली लाइन में खड़ा कर देता है, जहाँ वह महिलाओं के साथ बदतमीजी करता रहता है। वही बदतमीज़ी देवसेना से करने की कोशिश के जबाब में देवसेना अपनी कटार से उसकी उँगलियाँ काट देती है।

इस बार सभा में देवसेना को हथकड़ियां लगाकर पेश किया जाता है। अमरेंद्र सभा में ही देवसेना से उसके अपराध का कारण पूछता है और कारण सुनते ही अपनी तलवार से उस आमात्य का गला काट देता है।

इसे राजद्रोह कहा जाता है और इस अपराध के बदले शिवगामी उसे नगर निकाला दे देती है, जहाँ अमरेंद्र मजदूर बनकर भी राजाओं सी आन बान से रहता है।

कुमारवर्मा को एक व्यक्ति अमरेंद्र की हत्या की नीयत से आता और भागता दिखता है। उसका पीछा करने पर वह भल्लालदेव की बातें सुन पाता है जहाँ भल्लालदेव अपने बाप को भी धकेल कर अमरेंद्र की हत्या की बात करता है।

कुमारवर्मा के सामने आने पर भल्लालदेव का पिता उसे अपने ही बेटे को मारने के लिए कहता है, ताकि प्रजा उसके बेटे के आतंक से मुक्त हो सके।

लेकिन जब कुमारवर्मा भल्लालदेव को मारने पहुँचता है तो खुद ही मारा जाता है। भल्लालदेव और उसका पिता शिवगामी को,  कुमारवर्मा को अमरेंद्र का भेजा कातिल बताते हैं।

भल्लालदेव और उसका पिता शिवगामी से माहिष्मती के राजा को मारने के जुर्म में अमरेंद्र को मौत की सजा देने को कहते हैं।

शिवगामी कट्टपा को आदेश देती है कि वह अमरेंद्र को मार दे।

कट्टपा के इंकार करने पर शिवगामी खुद ही अमरेंद्र को मारने की बात करती है।

माँ को बेटे की हत्या के कलंक से बचाने के लिए कट्टपा इस काम के लिए तैयार हो जाता है और अमरेंद्र को पीछे से तलवार घोंपकर मार देता है।

अमरेंद्र मरते वक़्त भी कट्टपा से अपनी माँ का खयाल रखने के लिए कहता है।

कट्टपा लौटकर अमरेंद्र का रक्त शिवगामी के हाथों में लगाकर सारी सच्चाई बता देता है।

तभी वहां भल्लालदेव, उसका पिता और देवसेना आ जाते हैं। देवसेना ने एक बेटे को जन्म दिया है। भल्लालदेव के उस बेटे को भी मार देने के कहने के जबाब में शिवगामी अपने महल के परकोटे से ही महेंद्र बाहुबली को माहिष्मती का नया राजा घोषित कर देती है।

भल्लालदेव वहां मार काट करने लगता है।

शिवगामी बच्चे को लेकर कट्टपा की मदद से भागती है मगर भल्लालदेव के तीर का शिकार हो जाती है।

बाद में, कट्टपा शासन का सेवक बन जाता है और देवसेना भल्लालदेव की बंदी।

अब कहानी वर्तमान की…

महेंद्र यानि शिवा अपने माता पिता की कहानी जानकर भड़क उठता है और किसानों आदिवासियों की मदद से किले पर हमला कर देता है।

हमले में जबाब में भल्लालदेव अपने फ्रंट चक्र वाले रथ से सबको काटकर, देवसेना को उसी रथ पर लादकर महल में वापस ले आता है और महल के दरवाजे बंद कर देता है।

महेंद्र किले के सामने रेगिस्तान जैसी जगह में लगे ताड़ जैसे ऊँचे पेड़ों को गुलेल की तरह इस्तेमाल करके अपनी टीम के साथ महल की दीवार पार कर जाता है जहाँ बाद में उसकी भल्लालदेव से लंबी फाइट होती है।

चूँकि 25 साल का समय बीत गया है,  इसलिए देवसेना वही विशेष पूजा करने के लिए अपने सर पर अग्निकुंड रखती है और पूजावेदी की तरफ बढ़ती है।

उसके रास्ते में पड़ने वाले छोटे से पुल के जला दिए जाने पर महेंद्र, भल्लालदेव की मूर्ति गिराकर पूजा वेदी तक जाने का रास्ता साफ करता है। देवसेना भल्लालदेव की गिरी हुई मूर्ति के सर पर पाँव रखकर अपनी परिक्रमा पूरी करती है और लौट कर उसी कुंड में, जहाँ उसने भल्लालदेव को मारने की शपथ ली होती है, घायल भल्लालदेव को जलाकर अपनी शपथ पूरी करती है।

महेंद्र का माहिष्मती के राजा के तौर पर राज्याभिषेक किया जाता है जहाँ उसके ‘मेरा वचन ही है शासन’ की शपथ के साथ फिल्म खत्म होती है।

कहानी कहीं कहीं आपको महाभारत और गेम ऑफ़ थ्रोन्स की शर्तिया याद दिलाएगी।

क्यों देखें-

शानदार VFX की वजह से फिल्म आँखों के लिए ट्रीट सरीखी है। आप इसे हिंदुस्तानी सिनेमा की हॉलीवुड सिनेमा के दरवाजे पर मजबूत दस्तक सुनने के लिए भी देख सकते हैं।

हाल फिलहाल इसके अलावा कोई ऐसी फिल्म है भी नहीं जिसके लिए इसे छोड़कर फिल्म देखने के काम पर पैसे खर्च किये जायें।

क्यों ना देखें – 

अगर हाउसफुल होने की वजह से टिकेट ना मिल पा रहा हो।

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2 comments on “​फिल्म समीक्षा – बाहुबली 2- ‘कट्टप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’

  1. हमने तो फर्स्ट शो देखा था!
    थोड़ी बहुत कॉमेड़ी भी है जिसका जिक्र ना कर पाये!

    1. अरविन्द जी,
      लेखक का ध्यान इस महत्वपूर्ण बिंदु की तरफ दिलाने के लिए आपका धन्यवाद।

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