​महविश की चिठ्ठी 

 

 

 

 

 

रचनाकार- महविश रिजवी

(महविश पत्रकारिता की छात्रा हैं, सामायिक मुद्दों पर लेख और कहानियां लिखती हैं।’फ़लक’ नामक लघुकथा संग्रह में इनकी रचनायें छप चुकी हैं)

ओछेपन और जिज्ञासा में एक बहुत बारीक सी रेखा का फर्क है…जैसे अश्लील और कामुक में। आप मुझसे तीन तलाक़, औरतों के अधिकार, रिश्तेदारी में शादी या इस्लाम के किसी भी नियम के बारे में पूछें तो मैं बेझिझक,सबूत के साथ आपकी हर बात का जवाब दूंगी, दिया भी।लेकिन जब आपका हर सवाल सेक्स, खतना और masturbation के इर्द गिर्द ही घूमे तो मुझे भी समझ आता है कि आपकी ज़हनियत क्या चाहती है। आपको तकलीफ हो उठती है कि मुसलमान, ‘मॉडर्न मुसलमान’ हिजाब ना पहनने वाले, जीन्स पहनने वाले, अच्छा पढ़ने लिखने वाले लड़के-लड़कियाँ आपके हर टेढ़े सवाल का भी सीधा जवाब रखते हैं…और, फिर जब आप संतुष्ट होने की स्थिति में आ जाते हैं तब आप फिर से अग्रेसिव हो उठते हैं।

आप साथ दे नही सकते, क्योंकि दूसरे ठेकेदार आपका जीना हराम कर देंगे…क्योंकि आपमें सही को सही बोलने की हिम्मत नही है।

आप पूछते हैं कि क्या इस्लाम में अंतःवस्त्र पहनने की मनाही है…क्योंकि आपके कुछ दोस्त नंगे घूमते थे आपके  सामने! आपकी मंशा उस वक़्त ही समझ आती है पर तब भी जवाब देते हैं।

मुसलमानों घरों में अच्छी तादाद में मर्द होते हैं…हम भी बचपन से अब तक उनके साथ ही रहे हैं और उनके साथ खेले, पले बढ़े हैं। जब आप खुद को मुसलमानों का दोस्त बता रहे हैं तो आपको इतना छोटा सा नियम नही पता कि हमारे यहां बिना ‘रुमाली’ के, अंतःवस्र के नमाज़ नही पढ़ी जा सकती है, बल्कि ऐसा कपड़ा पहनने की भी मनाही है। आज के वक़्त में जब दो साल का बच्चा भी किसी के सामने अपना नेकर नही उतारता तब आप मुझसे कह रहे हैं कि आपने जवान ‘मुसलमान मर्दो’ को ऐसे ही नंगे घूमते देखा है? कुछ चीज़ें धर्म से नही, समाज और आस-पास के वातावरण से जुड़ी होती हैं।

आप मुझसे पूछ रहे हैं कि इस्लाम में masturbation जायज़ है क्या?

मैं आपसे पूछती हूँ क्या किसी भी धर्म में शराब पीना, जुआ खेलना, दहेज मांगना, लड़कियों पर एसिड अटैक करना जायज़ है?

शायद आपके पास भी जवाब नही होगा।

क्योंकि ये धर्म की बातें नही हैं, इंसान के ज़मीर की बातें हैं।

हर चीज़ धर्म ना सिखा सकता है ना बता सकता है। कुछ चीज़ें आपके अपने विवेक की होती हैं।

धर्म सिर्फ आपके ज़मीर को ज़िंदा रखने का काम करता है।

कल कोई मुसलमान चोरी करते पकड़ लिया जाएगा तो आप पूछेंगे की इस्लाम में चोरी जायज़ है? कल कोई मुसलमान गरीबी की वजह से पूरे कपड़ो में नही होगा तब आप सवाल करेंगे कि क्या इस्लाम में फटे कपड़े पहनने का नियम है?

अगर आपकी ज़िद ही हर चीज़ में इस्लाम घसीटने की है तो मैं क्या खुद ऊपरवाला भी आपके प्रश्नों का उत्तर नही देना चाहेगा।

मुसलमानो में सिर्फ ज़ुल्म होते हैं औरतों पर ?सिर्फ एक साथ तीन बार तलाक़ कहकर किसी भी मुसलमान औरत को छोड़ दिया जाता है? …लेकिन आप किसी लड़की से masturbation, सेक्स सैटिस्फैक्शन या इसी तरह के मुद्दों पर बात करना पसंद कर सकते हैं।

और मैं आपकी बीवी की नही, किसी और की अंजान बहन, बेटी की बात कर रही हूँ।

अगर आपको तीन तलाक़ का सही तरीक़ा समझा दिया जाए तो क्या आपको बुरा लगना चाहिए?  इसके बाद पाकिस्तान और तालिबान की हरकतें गिनाने लगना चाहिए? सर हम हिंदुस्तान के हैं, यहीं पैदा हुए…यहीं मरेंगे, हम यहाँ के लोगो की जवाबदेही कर सकते हैं अरब, मलेशिया, पाकिस्तान में क्या हो रहा है…ये हम क्यों जाने? क्या ज़रूरत है हमे, हम क्यों उस पर टिप्पणी करें?  सोचने के लिए हमारा अपना देश कम है क्या? किस देश में कौनसा क़ानून है, क्या घटित हुआ ये हम और आप भारत में बैठकर क़यास ही लगा रहे हैं।

हमें ज़मीनी हक़ीक़त का क्या पता!

अगर कोई अमरीकी, अखबार में खबर पढ़कर भारत को बलात्कार की राजधानी बता दे तो क्या ये बात सच हो जाएगी?  वो अपने घर में बैठकर राय बना रहा है।

हमारा देश कैसा है ये तो हम बेहतर जानते हैं।

इतनी सफाई देने के बाद आप कहते हैं कि हमारे दिल में कपट है!

खुदा ना करे कभी ऐसा हो क्योंकि ‘इस्लाम’ हमे सिखाता है कि आप जिस वतन में हैं उस वतन से मोहब्बत ज़रूरी है, अगर आप में वतनपरस्ती नही है तो आप मौत की सज़ा के हकदार हैं।

मैं खुदा से दुआ करूँगी कि हिंदुस्तान का हर मोमिन नक्सली या आतंकवादी बनने से पहले मर जाए।

अगर वतन इंसाफ ना भी कर सका तो खुदा तो ज़रूर करेगा।

बाक़ी, आपको अगर इस्लाम के बारे में जानने की इतनी ही इच्छा है पर आपका हर टॉपिक सिर्फ सेक्स से ही जुड़ा है तो एक बार कुरानशरीफ पढ़ भी लीजिये…आपको हर सवाल का जवाब मिल जाएगा।

अगर क़ुरआन पढ़ने से कोई धर्म भ्रष्ट हो रहा हो तो इंसानियत पढ़ लीजिये।

(सामयिक मुद्दों पर लिखे गए लेख लेखक/लेखिका की अपनी व्यक्तिगत राय होती है और उससे सहमत/असहमत होना हिंदी रचना संसार के लिये आवश्यक नही है)

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